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बंगाल नहीं, केंद्र के कर्ज तले दबा है देश का भविष्य
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर पहुँच गया है। रविवार को मथुरापुर की पावन धरती पर आयोजित तृणमूल की विशाल जनसभा में राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए अभिषेक ने न केवल भाजपा के सोनार बांग्ला के वादे को खोखला बताया, बल्कि आंकड़ों की ऐसी बिसात बिछाई कि दिल्ली की सत्ता में बैठे सूरमाओं को जवाब देना भारी पड़ गया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंगाल को बदनाम करने की कोई भी साजिश सफल नहीं होगी, क्योंकि यहां की जनता अब दिल्ली के जमींदारों के बहकावे में आने वाली नहीं है। चुनावी शंखनाद करते हुए अभिषेक ने आंकड़ों की बाजीगरी के जरिए केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया और बंगाल को बदनाम करने की साजिश का करारा जवाब दिया। उन्होंने गृह मंत्री के उस दावे पर पलटवार किया जिसमें बंगाल में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे पर 77 हजार रुपये के कर्ज की बात कही गई थी। अभिषेक ने देश की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि अगर बंगाल का बच्चा कर्जदार है, तो केंद्र की नीतियों के कारण आज देश में जन्म लेने वाला हर मासूम 1.44 लाख रुपये के भारी कर्ज के साथ इस दुनिया में कदम रख रहा है। अभिषेक बनर्जी ने वर्ष 2014 के पूर्व की स्थिति और वर्तमान आर्थिक परिदृश्य की तुलना करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश का कुल कर्ज 56 लाख करोड़ से बढ़कर कई गुना हो चुका है। उन्होंने केंद्र को चुनौती दी कि यदि उनके आंकड़े गलत हैं, तो सरकार सार्वजनिक रूप से इसे गलत साबित करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के शासनकाल में बंगाल ने न केवल विरासत में मिले कर्ज का बोझ उठाया, बल्कि सीमित संसाधनों और केंद्र द्वारा रोकी गई बकाया राशि के बावजूद लक्खी भंडार जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाया। अपने संबोधन में उन्होंने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी कड़ा प्रहार किया।
एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले उन राज्यों में सर्वाधिक हैं जहाँ भाजपा की सरकारें हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए पूछा कि जो दल अपने शासित राज्यों में सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, वह बंगाल को क्या सोनार बांग्ला देगा? अभिषेक ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए गृह मंत्रालय को घेरा कि राजधानी की पुलिस सीधे केंद्र के अधीन होने के बावजूद वहां महिलाओं के खिलाफ अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि बंगाल की छवि खराब करने की कोई भी राजनीतिक कोशिश सफल नहीं होगी और मथुरापुर की यह जनसभा केवल एक ट्रेलर है, जिसकी पूरी फिल्म चुनाव परिणाम के दिन जनता दिखाएगी।
अभिषेक बनर्जी ने केंद्र द्वारा राज्य की बकाया राशि (मनरेगा और आवास योजना) रोकने पर भी कड़ा रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने केंद्र के सौतेले व्यवहार के बावजूद अपने संसाधनों से लक्खी भंडार जैसी योजनाओं को जारी रखा। उन्होंने घोषणा की कि मार्च 2026 तक एससी/एसटी वर्ग की महिलाओं को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 1,700 रु. प्रतिमाह (यानी सालाना 20,400 रु.) कर दिया गया है, जो ममता सरकार की नारी शक्ति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संबोधन के अंत में उन्होंने समर्थकों में जोश भरते हुए कहा कि मथुरापुर की यह रैली महज एक ट्रेलर है, पूरी फिल्म तो चुनाव परिणाम वाले दिन प्रदर्शित होगी जब बंगाल की जनता विरोधियों को निर्णायक जवाब देगी।